President Draupadi Murmu

President Draupadi Murmu : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं- मो जीवन पछे नर्के पड़ी थाउ, जगत उद्धार हेउ

ऐतिहासिक क्षण... ‘जोहार’ से उड़िया संत तक..

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पहले वक्तव्य में समृद्ध जनजातीय विरासत का परिचय मिला।

शिक्षिका और जनप्रतिनिधि रहीं मुर्मू ने कहा कि जीवन का अर्थ केवल लोगों की सेवा करके ही समझा जा सकता है।

उन्होंने जनजातीय समुदाय से आए लोकप्रिय उड़िया संत कवि भीम भोई की इन पंक्तियों से अपना वक्तव्य पूरा किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पहला वक्तव्य जनजातीय अभिवादन ‘जोहार’ से शुरू हुआ

और भारत की जनजातीय संस्कृति और विरासत से ओतप्रोत रहा।

उन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ने वाले जनजातीय समुदाय के वीरों